नई दिल्ली, 16 अगस्त 2023: नेता और शासकों के जीवन के रंगमंच पर जब महत्वपूर्ण अवसर आते हैं, तो आम नागरिकों की समस्याओं का एक अलग रुप दिखाई देता है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के जन्मदिवस पर यह सच्चाई सामने आई कि कैसे एक तरफ उन्होंने खुद को गर्वित किया, वही दूसरी तरफ दिल्ली परिवहन निगम ( DTC) में महिला सुरक्षा में लगे बस मार्शलों की वेतन और बेरोजगारी जैसी कड़ी समस्या को अनदेखा कर दिया।
आज एडवोकेट कल्पना श्रीवास्तव के द्वारा मार्शलों को उनका वेतन दिलाने के लिए मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल जी के जन्मदिन के मौके पर उनके आवास के सामने महिला सुरक्षा में तैनात बस मार्शलों के साथ उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से मार्शलों के बारे में बात रखी, लेकिन उनकी आवाज़ सुनी गई कि नहीं पता नहीं। उन्होंने कहा कि मार्शलों को पिछले 2 महीनों से वेतन नहीं मिला है, कुछ मार्शलों को ट्रांसफर के नाम पर अपने घरों में बैठाया गया है। इसके अलावा, जिन मार्शलों को ड्यूटी पर जाने की इजाज़त मिली है, उन्हें पूरी ड्यूटी नहीं दी जा रही है। आपत्तिजनक तौर पर, एक मार्शल का ड्यूटी के दौरान पैर कट गया, लेकिन उसकी मदद के लिए कोई नेता या अधिकारी ने देखने की कोशिश नहीं की।
लेकिन मार्शलों की इतनी समस्याओं के बावजूद, अरविंद केजरीवाल जी अपने घमंड के कारण अपने आवास से बाहर नहीं आए उनके PA ने सभी मार्शलों को टालते हुए कह दिया कि उनकी फ़ाइल Divisional Commissioner के पास है, फिर सभी मार्शल Transport Commissioner के पास गए। जाने के बाद उन मार्शलों ने ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के पास जाकर बात की, जहाँ से पता चला कि सरकार ने ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट को किसी भी तरह का फंड ही जारी नही किया हैं, जिसके चलते मार्शलों को ना ही वेतन मिल पा रहा है और ना ही उन्हें ड्यूटी दी जा रही है, जिन्हें 2 महीनों से बेरोजगार कर दिया गया है।
इस साक्षात्कार से स्पष्ट होता है कि नेता अपने स्वयं के घमंड में खो जाते हैं और उनके साथी अधिकारियों ने भी महत्वपूर्ण मुद्दों नजर डालने की जगह उन्हें टाल दिया। इस घटना से साबित होता है कि नेता अपने घमंड में आने की बजाय अपने नागरिकों की समस्याओं की ओर ध्यान देने में सक्षम नही है।
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